मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा ना देने पर अड़ी ममता बनर्जी ,राष्ट्रपति शासन लगता है तो लगे
राष्ट्रपति शासन लगता है तो लगे, इस्तीफा नहीं दूंगी, :ममता बनर्जी ने कर दिए ये 3 नए ऐलान ममता बनर्जी

मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा ना देने पर अड़ी ममता बनर्जी ने बुधवार को तीन बड़े ऐलान किए हैं। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस चुनाव परिणामों को कानूनी रूप से चुनौती देगी, पार्टी राज्यभर में विरोध प्रदर्शन करेगी और लोकतंत्र बचाने के लिए जनता के बीच जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में बड़े स्तर पर साजिश हुई है और उनकी पार्टी का जनादेश छीना गया है।
ममता बनर्जी ने किए ये ऐलान
पश्चिम बंगाल की राजनीति में 15 साल के बाद बड़ा परिवर्तन आया है। 15 साल से लागातार सत्ता में रही ममता बनर्जी का 2026 के विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त मिली है। इन चुनाव में प्रचंडजीत के बाद भाजपा सूबे में पहली बार सरकार बनाने जा रही है। वहीं बंगाल में जारी इस राजनीतिक हलचल के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि चाहे राज्य में राष्ट्रपति शासन ही क्यों न लग जाए, लेकिन वह इस्तीफा नहीं देंगी। कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता ने चुनाव नतीजों और मतगणना प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
- ऐलान नंबर 1- ममता बनर्जी ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल का चुनाव हारने के बावजूद वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने नहीं जा रही हैं। ममता बनर्जी ने पार्टी की बैठक में कहा है कि बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगता है तो लग जाए लेकिन वह इस्तीफा नहीं देंगी.
- ऐलान नंबर 2- ममता बनर्जी ने कहा है कि अब वह और चंद्रिमा (चंद्रिमा भट्टाचार्य, टीएमसी नेता) अदालत में बतौर वकील प्रैक्टिस शुरू करने जा रहे हैं। ममता ने कहा कि अभी और आने वाले समय में तमाम केस खड़े होने वाले हैं। ऐसे में वह, चंद्रिमा, बिप्लब मित्रा और बिमान बनर्जी इन केसों को मुकाबला वकील बनकर करेंगे।
- ऐलान नंबर 3- ममता बनर्जी ने ऐलान कर दिया है कि वह अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को अकेला नहीं छोड़ेंगी। पार्टी की बैठक में उन्होंने सबसे साफ कहा है कि अभिषेक ने काफी कड़ी मेहनत की है। इसके बाद वह वहां मौजूद सभी लोगों के साथ खड़ी हुईं और अभिषेक बनर्जी की मेहनत को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार करते हुए तारीफ की। भाजपा ने रचा इतिहास : विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा ने पहली बार अपने दम पर सरकार बनाई और ममता बनर्जी के 15 साल लंबे शासन का अंत कर दिया। यह ऐतिहासिक जीत बंगाल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ है, जहां भाजपा शून्य से शिखर तक पहुंची।
- भाजपा की जीत के कारण
- रणनीतिक प्रचार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने बंगाल में गहन प्रचार किया।
- संगठन का विस्तार: बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता।
- जनाधार में बदलाव: युवाओं और शहरी मतदाताओं का झुकाव भाजपा की ओर।
- टीएमसी की चुनौतियाँ: भ्रष्टाचार और आंतरिक कलह ने तृणमूल कांग्रेस को कमजोर किया।




