(केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) ने बीते बुधवार को 12वीं कक्षा के नतीजे जारी किए
85.20 प्रतिशत छात्र पास हुए, जो पिछले साल के 88.39 प्रतिशत की तुलना में क़रीब तीन प्रतिशत कम है.

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बुधवार को 12वीं कक्षा के नतीजे जारी किए।सीबीएसई के इस साल के 12वीं कक्षा के नतीजे कई मायनों में अहम हैं। करीब 70 हज़ार शिक्षकों ने इस प्रक्रिया में हिस्सा लिया.(ओएसएम) प्रणाली के तहत लगभग 98.67 लाख कॉपियों को स्कैन कर डिज़िटल रूप से जांचा गया.
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बुधवार को 12वीं कक्षा के परिणाम जारी किए। इस साल 85.20 प्रतिशत छात्र पास हुए, जो पिछले साल के 88.39 प्रतिशत की तुलना में करीब तीन प्रतिशत कम है। नतीजों में गिरावट छात्रों और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय है, लेकिन डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली शिक्षा जगत में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।
सीबीएसई ने पहली बार उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली लागू की। इसके तहत कॉपियों को स्कैन कर डिजिटल रूप से जांचा गया। बोर्ड का दावा है कि इस तकनीक से मूल्यांकन प्रक्रिया तेज़, पारदर्शी और त्रुटिरहित हुई, और इसी वजह से परिणाम भी कम समय में घोषित किए जा सके।कुल 85.20 प्रतिशत छात्र पास हुए, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 88.39 प्रतिशत था। कोविड महामारी के बाद यह पास प्रतिशत में सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
📌 मुख्य तथ्य
- इस साल पास प्रतिशत: 85.20%
- पिछले साल: 88.39%
- गिरावट: लगभग 3%
- नई प्रणाली: पहली बार लागू हुई ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM)
- जांची गई कॉपियाँ: लगभग 98.67 लाख
- शामिल शिक्षक: करीब 70,000
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन से पारदर्शिता तो बढ़ी है, लेकिन पास प्रतिशत में गिरावट यह संकेत देती है कि मूल्यांकन पहले से अधिक सख़्त हुआ है। सीबीएसई का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में तकनीकी बदलाव की दिशा में एक बड़ा प्रयोग है। नतीजों में गिरावट छात्रों और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय है, लेकिन पारदर्शी और तेज़ मूल्यांकन प्रणाली भविष्य में शिक्षा जगत के लिए नई राह खोल सकती है।




