
रायपुर : 21 मई गुरुवार सुबह 11 बजे,राजधानी रायपुर के माना स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से एक बड़ी और बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। एयरपोर्ट परिसर के भीतर मरम्मत कार्य के दौरान एक मजदूर करीब 30 फीट से अधिक ऊंचाई से नीचे गिर गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी हालत मृत बताई गई। हादसे के बाद एयरपोर्ट में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मजदूर को कोई सेफ्टी बेल्ट या सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए थे। इतनी ऊँचाई पर बिना सुरक्षा साधनों के काम कराना सीधी लापरवाही माना गया। लोगों ने सुरक्षा इंतज़ामों पर सवाल उठाए। कुछ देर तक एयरपोर्ट परिसर में हंगामा रहा और उसे तुरंत अस्पताल ले गया, मौके पर हंगामा का माहौल बन गया यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया।
घटनाक्रम में क्रांति सेना की दखल :
क्रांति सेना ने मीडिया को बुलाकर घटना को बड़े पैमाने पर उठाया।क्रांति सेना ने जोरदार हंगामा किया। अस्पताल में हंगामा के बाद जब सुरक्षा चूक और मुआवज़े की बात उठी। सवाल किया गया कि बिना सेफ्टी बेल्ट मजदूर से काम क्यों कराया गया और जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की जा रही।क्रांति सेना ने मजदूर परिवार को न्याय दिलाने की मांग की और कहा कि मुआवज़ा तुरंत तय होना चाहिए।इस दबाव के चलते एयरपोर्ट प्रबंधन और ठेकेदार को सामने आकर जवाब देना पड़ा।पत्रकारों ने एयरपोर्ट प्रबंधन से सवाल किए, लेकिन DGM (Deputy General Manager) ने जवाब देने से बचने की कोशिश की। इससे माहौल और गरम हो गया।
घटनाक्रम और विवाद :
प्रत्यक्षदर्शियों और मीडिया ने सवाल उठाया कि जब मजदूर गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया जा रहा था, तो उसका ID कार्ड गले से क्यों निकाला गया। अगर सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए, तो यह लापरवाही मानी जाएगी। जवाब देना होगा कि ठेकेदार की निगरानी क्यों नहीं की गई। उसके परिवार को कानूनी रूप से मुआवज़ा मिलना चाहिए।
मुआवज़े पर सहमति :
- अंतिम संस्कार खर्च: ₹1 लाख रुपये दिए जाएंगे ताकि परिवार को तुरंत राहत मिल सके।
- मासिक सहायता: मृतक की सैलरी के बराबर ₹22,000 प्रति माह उसके परिजनों को दिया जाएगा।
- अवधि: यह मासिक सहायता 60 साल तक जारी रहेगी, जिससे परिवार को दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
- प्रशासन ने आश्वासन दिया कि परिवार को आर्थिक मदद दी जाएगी और राहत कोष से भी सहयोग दिलाया जाएगा। साथ ही, सुरक्षा मानकों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
- स्थिति को शांत करने के लिए अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि परिवार के अधिकार और पहचान से जुड़ी कोई समस्या नहीं होगी। मुआवज़े और सहायता की बात पर सहमति बनी, ताकि परिवार को आर्थिक सहयोग मिल सके।
- मुआवज़े पर सहमति क्रांति सेना और मीडिया ने मुद्दा नहीं उठाया होता, तो मुआवज़े की बात इतनी जल्दी सामने नहीं आती।




