सेबी की चेतावनी के बावजूद खरीदा ₹16,670 करोड़ का डिजिटल गोल्ड, 50% बढ़ गई खरीदारी
गोल्ड किंग राजेश मेहता पर 15 लाख 15 हजार करोड़ की हेराफेरी का आरोप

भारत में हाल ही में सामने आया 15.15 लाख करोड़ रुपये का घोटाला।सेबी ने एक विस्फोटक खुलासा किया है। SEBI ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने अपने राजस्व को 97–99% तक फर्जी तरीके से बढ़ाकर दिखाया, जिससे शेयर बाजार और निवेशकों को भारी नुकसान हुआ। LIC जैसी सरकारी संस्था भी प्रभावित हुई है, क्योंकि उसका कंपनी में बड़ा निवेश था। राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने अपनी बैलेंस शीट और वित्तीय रिपोर्ट में 2020 से 2025 के बीच लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये का राजस्व बढ़ाकर दिखाया। SEBI की जांच में सामने आया कि असली कारोबार बहुत छोटा था लेकिन कागज़ों पर उसे कई गुना बड़ा दिखाया गया।
नई दिल्ली: मार्केट रेगुलेटर सेबी ने बेंगलुरु की जूलरी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड और उसके चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश मेहता के खिलाफ एक अंतरिम आदेश जारी किया है। कंपनी पर बड़े पैमाने पर गलत वित्तीय जानकारी देने, फंड का गलत इस्तेमाल करने और कॉर्पोरेट गवर्नेंस में गंभीर कमियों के आरोप लगाए गए हैं। सेबी की जांच के मुताबिक राजेश एक्सपोर्ट्स ने कथित तौर पर वित्त वर्ष 2021 और वित्त वर्ष 2025 के बीच लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू के बारे में गलत जानकारी दी। इसमें से 99.8 फीसदी रेवेन्यू बढ़ाचढ़ाकर दिखाया गया था। सेबी के आदेश में कहा गया कि मेहता कंपनी के भीतर प्रमुख निर्णय लेने वाले अधिकारी थे। कंपनी तथा उसकी सहायक कंपनियों के दैनिक कामकाज और वित्तीय कार्यों पर उनका काफी नियंत्रण था। सेबी ने राजेश मेहता को अगले आदेश तक कंपनी की सिक्योरिटीज को खरीदने, बेचने या उनमें कारोबार करने से रोक दिया है। कंपनी और उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ सेबी का अंतरिम आदेश आने के बाद आज कंपनी का शेयर 5% के लोअर सर्किट पर पहुंच गया। साथ ही एलआईसी के शेयरों में 1% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरहोल्डिंग आंकड़ों के अनुसार कंपनी में एलआईसी की 10.80% हिस्सेदारी है।
कौन हैं राजेश मेहता?
बेंगलुरु : 20 जून, 1964 को जन्मे राजेश मेहता राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन हैं। वह गोल्ड और जूलरी इंडस्ट्री में जाना माना नाम हैं। बेंगलुरु के सेंट जोसेफ स्कूल से पढ़ाई करने के बाद मेहता कम उम्र में ही अपने पिता के जूलरी बिजनेस में शामिल हो गए। 1980 के दशक की शुरुआत में मेहता और उनके भाई प्रशांत ने चांदी के गहनों का बिजनेस शुरू करने के लिए अपने सबसे बड़े भाई से 1,200 रुपये उधार लिए। यह वह दौर था जब देश में जूलरी बिजनेस काफी हद तक असंगठित था।
2015 में राजेश एक्सपोर्ट्स उस समय सुर्खियों में आई जब उसने 400 मिलियन डॉलर में स्विस रिफाइनरी Valcambi को खरीदा। यह डील पूरी तरह कैश में थी। इससे कंपनी को पूरी दुनिया में अपने पैर पसारने का मौका मिला। Forbes के मुताबिक अक्टूबर 2019 तक मेहता की नेटवर्थ रब डॉलर थी।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा
- फर्जी इनवॉइस और लेन-देन: कंपनी ने ऐसे सौदे दिखाए जो असल में हुए ही नहीं।
- राजस्व का कृत्रिम इजाफा: असली बिक्री को कई गुना बढ़ाकर रिपोर्ट किया गया।
- ऑडिट और रिपोर्टिंग की खामियां: ऑडिटर्स ने समय पर पकड़ नहीं की, जिससे यह लंबे समय तक छिपा रहा।
असर
- शेयर बाजार: कंपनी का शेयर ₹239 से गिरकर ₹100 तक आ गया।
- LIC और निवेशक: LIC का लगभग ₹1,600 करोड़ का नुकसान हुआ, जिससे आम जनता के पैसे पर सीधा असर पड़ा।
- विश्वसनीयता पर चोट: भारतीय कॉर्पोरेट गवर्नेंस और रेगुलेटरी सिस्टम पर सवाल उठे।
- निवेशकों पर सीधा असर: लाखों छोटे निवेशकों और पॉलिसीधारकों का पैसा डूबा।
- बाजार पर असर: भारतीय शेयर बाजार की विश्वसनीयता पर सवाल उठे।
- राजनीतिक विवाद: विपक्ष ने इसे “मोदी राज का सबसे बड़ा घोटाला” बताया और सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए।
- निवेशकों को हमेशा कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट और कैश फ्लो पर पर सख्त निगरानी जरूरी है। सिर्फ राजस्व और मुनाफे पर नहीं।
- बड़ी संस्थाओं (जैसे LIC) के निवेश पर भी पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।




