आवारा कुत्तों की हुई आरती और तिलक, जगदलपुर महापौर ने दूध-आहार खिलाकर किया सेंटर का शुभारंभ
जगदलपुर में आवारा कुत्तों की नसबंदी कार्यक्रम की शुरुआत एक अनोखे अंदाज़ में हुई।

जगदलपुर में आवारा कुत्तों की नसबंदी कार्यक्रम की शुरुआत एक अनोखे अंदाज़ में हुई। महापौर ने ABC (Animal Birth Control) सेंटर का शुभारंभ करते समय कुत्तों की आरती उतारी, तिलक लगाया और उन्हें दूध-आहार खिलाया। यह केंद्र आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के लिए बनाया गया है। शहर में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करना, रेबीज़ जैसी बीमारियों की रोकथाम करना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। यह पहल न केवल स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान का भी प्रतीक है।
शहर में पहली बार आवारा कुत्तों की नसबंदी अभियान की शुरुआत धार्मिक और संवेदनशील तरीके से की गई। महाराणा प्रताप वार्ड स्थित एसएलआरएम (सॉलिड-लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट) डोंगरी सेंटर परिसर में नगर निगम द्वारा स्थापित एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC Center) सेंटर का शुभारंभ महापौर संजय पांडेय ने किया। संस्था के लुप्तेश जगत को समिति में शामिल किया गया है।यह संस्था अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रही है। आवारा कुत्तों की संख्या घटने से सड़कों और मोहल्लों में स्वच्छता और सुरक्षा बढ़ेगी।
पशु प्रेमी संस्थाओं की भी भागीदारी 22 श्वानों का होगा उपचार और टीकाकरण फिलहाल धरमपुरा क्षेत्र से पकड़े गए 22 आवारा श्वानों को एबीसी सेंटर में रखा गया है। यहां स्नेह एनिमल वेलफेयर सोसायटी के चिकित्सकों द्वारा उनका बधियाकरण, डी-वार्मिंग और रेबीज टीकाकरण किया जाएगा। उपचार के बाद तीन दिनों तक उनकी विशेष निगरानी की जाएगी। पूरी तरह स्वस्थ होने पर उन्हें उसी क्षेत्र में छोड़ा जाएगा, जहां से पकड़ा गया था। पशु प्रेमी संस्थाओं की भी भागीदारी अभियान में शहर की पशु प्रेमी संस्था स्ट्रे सेफ फाउंडेशन भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। संस्था के लुप्तेश जगत को निगरानी समिति में शामिल किया गया है। उनका दायित्व यह सुनिश्चित करना होगा कि श्वानों को पकड़ने, उपचार और छोड़ने की प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की क्रूरता न हो।
🐕 कार्यक्रम की खास बातें
- शहर में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करना।
- रेबीज़ जैसी बीमारियों की रोकथाम।
- नागरिकों की सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करना।
- बधियाकरण (Sterilization)
- डी-वार्मिंग (कृमिनाशक उपचार)
- रेबीज़ टीकाकरण
🌿 पशु प्रेमी संस्थाओं की भागीदारी
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स्ट्रे सेफ फाउंडेशन: यह संस्था अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
- लक्ष्य: हर महीने लगभग 500 आवारा श्वानों का बधियाकरण और टीकाकरण।
- निगरानी समिति: संस्था के लुप्तेश जगत को समिति में शामिल किया गया है।
- जिम्मेदारी: यह सुनिश्चित करना कि पकड़ने, उपचार और छोड़ने की प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की क्रूरता न हो।
- जन स्वास्थ्य सुरक्षा: नसबंदी से अनियंत्रित प्रजनन रोका जा सकेगा।
- सामाजिक सौहार्द: पशुओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाकर नागरिकों में सकारात्मक संदेश देना।
- 🌿महत्व यह पहल केवल नसबंदी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान समाज में सौहार्द और करुणा को बढ़ावा देता है। प्रशासन ने इसे धार्मिक और सांस्कृतिक रंग देकर नागरिकों को जोड़ने की कोशिश की है।
👉 यह एक अनोखा उदाहरण है कि कैसे जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सामाजिक और सांस्कृतिक भावनाओं के साथ जोड़ा जा सकता है, ताकि लोग इसे सकारात्मक रूप से स्वीकार करें। 🌿
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